पिछले कुछ हफ्तों में पूरे देश में भारी बारीश ने लोगन को परेशान कर दिया है। उत्तर भारत में दिल्ली‑अग्रा, पश्चिमी घाट में पुणे‑मुंबई तक बारिश का पैमाना बढ़ रहा है। इधर‑उधर जलस्तर तेज़ी से ऊपर जा रहा है, इसलिए आपको रोज़ की खबरों पर नजर रखनी चाहिए।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस सप्ताह के अंत में पश्चिमी मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में तीव्र वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। समुद्री तट वाले क्षेत्रों में मॉन्सून की हवाएँ लगातार आती रहेंगी, जिससे मुंबई‑कोलकाता तक शाम‑संध्या में बारिश बनी रहेगी। अगर आप इन जिलों में रहते हैं तो सुबह‑शाम के समय स्थानीय समाचार चैनल या आधिकारिक ऐप से अलर्ट चेक करते रहें।
पहला काम – बाहर निकलते समय जाँचें कि सड़क पानी भर रही है या नहीं। जलभराव वाले रास्ते पर गाड़ी चलाने से दुर्घटना का जोखिम बढ़ता है, इसलिए वैकल्पिक मार्ग चुनें या सार्वजनिक परिवहन उपयोग करें। घर में रखें एक छोटा आपातकालीन किट: टॉर्च, बैटरी, सूखे भोजन, पानी की बोतल और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री।
बिजली के साथ सतर्क रहें – बारिश में प्लग या सॉकेट गीले न हों। अगर लाइट कट हो तो फॉलो‑अप लाइट के बजाय टॉर्च इस्तेमाल करें। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को सूखी जगह पर रखें, और चार्जिंग के समय पानी के पास से दूर रहें।
स्वास्थ्य का ख्याल रखिए – बरसात में नमी बढ़ने से फंगल इन्फेक्शन या एलर्जी की समस्या हो सकती है। घर में वेंटिलेशन खोलें लेकिन तेज़ हवा से बचें, और कपड़े धूप में सुखाएँ। यदि आपको सर्दी‑जुकाम या बुखार लगे तो डॉक्टर से संपर्क करें; बारिश के कारण रोग फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है।
कृषि सेक्टर पर असर भी देखना ज़रूरी है। किसान भाईयों को खेतों में जलभराव की खबर मिलते ही फसल बचाने के उपाय अपनाएँ – जैसे जुताई रोकें, पत्तियों को ढकें और आवश्यकतानुसार बायो‑ड्रेनजेज़ बनवाएँ। सरकार की राहत योजनाओं का लाभ उठाने के लिए स्थानीय अधिकारी से संपर्क रखें।
पर्यटन या यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह समय सावधानीपूर्ण योजना बनाने का है। ट्रेन, बस या फ्लाइट शेड्यूल में देर हो सकती है; टिकट बुकिंग से पहले रजिस्ट्री और रीफ़ंड पॉलिसी चेक करें। अगर आप रोड ट्रिप पर हैं तो ड्राइवर को जलभराव वाले ब्रिज या गड्ढों के बारे में पहले से बता दें, ताकि अचानक रोकावट न आए।
समुदाय में मदद का हाथ बढ़ाना भी बहुत महत्वपूर्ण है। पड़ोसी घरों में पानी भरने की स्थिति देख कर तुरंत सूचना दें और जरुरत पड़ने पर बचाव कार्य में सहयोग करें। स्थानीय स्वच्छता अभियान या स्वयंसेवी समूहों के साथ मिलकर जल निकासी को तेज़ करने में हिस्सा ले सकते हैं।
अंत में, सबसे बड़ी बात – डरना नहीं, तैयार रहना है। मौसम की खबरें पढ़ते रहें, आपातकालीन नंबर (112) सेव में रखें और परिवार के सभी सदस्यों से संपर्क बनाए रखें। सही जानकारी और सावधानी से भारी बारीश को सहजता से पार किया जा सकता है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 18 जुलाई को केरल में अत्यधिक भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। पूरे राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना के कारण स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। लोगों को समुद्र में न जाने और मछुआरों को मछली पकड़ने से बचने की सलाह दी गई है।
मुंबई में भारी बारिश से रेल सेवाओं में गंभीर रुकावट आई है और दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है। शहर में 300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया और कई मकान ढह गए। वाहनों के बह जाने और शाहपुर तालुका में एक पुल के बर्बाद होने की भी खबरें आई हैं। बीएमसी ने कर्मचारियों के लिए छुट्टी घोषित की है और एयरलाइनों ने भी परामर्श जारी किया है।