क्या आप भी वैष्णो देवी का दर्शन करना चाहते हैं लेकिन नहीं जानते कि कहाँ से शुरू करें? चलिए, आसान‑आसान कदमों में समझते हैं कि इस पवित्र यात्रा को कैसे सरल और आरामदायक बनाएं। सबसे पहले, यह जान लें कि शृंगारी पर्वत पर स्थित ये मंदिर हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है, इसलिए योजना बनाना ज़रूरी है।
वैष्णो देवी का मौसम दो मुख्य सीज़न में बाँटा गया है – अप्रैल‑जून और सितंबर‑अक्टूबर। इन महीनों में ट्रैक पर हल्का तापमान रहता है, बारिश कम होती है और रास्ता साफ़ रहता है। अगर आप गर्मी से बचना चाहते हैं तो जून के पहले या जुलाई‑अगस्त की धूप वाली अवधि छोड़ दें, क्योंकि उस समय सड़कों पर भारी भीड़ और उच्च तापमान हो सकता है।
सबसे निकटतम हवाई अड्डा श्रीनगर (SXR) या जम्मू (IXJ) है। कई यात्रियों के लिए जम्मू‑कश्मीर रेल लाइन का उपयोग करना आसान रहता है क्योंकि जालंधर से कड़ी ट्रेनें चलती हैं। एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप बस, टैक्सी या साझा वाहन ले सकते हैं जो बारामुला तक पहुँचाते हैं – यही वह जगह है जहाँ से वैष्णो देवी ट्रेक शुरू होता है (लगभग 13 किमी)।
बारामुला में पहुंचते ही दो विकल्प मिलेंगे: पैर पर चलना या पहिये वाले ट्रैक्टर/टैक्सी का उपयोग करना। अधिकांश लोग पहले दो घंटे पैदल चलते हैं और फिर रॉकी कार में बदल लेते हैं, जिससे कुल समय लगभग 4‑5 घंटे रहता है। अगर आप बच्चा या बुज़ुर्ग के साथ यात्रा कर रहे हैं तो सीधे वाहन से ऊपर तक जाना आरामदेह रहेगा।
यात्रा के दौरान कुछ जरूरी चीज़ें याद रखें:
पावत्री मंदिर (जैसे कि काली जटा) पर पहुँचते ही आप देखेंगे कि कई छोटे‑छोटे शिविर लगे होते हैं जहाँ से आप ठहर सकते हैं। अगर पहले से बुकिंग करवाई है तो बेहतर होगा, क्योंकि पीक सीजन में जगह कम मिलती है। साधारण तंबू या लॉज भी उपलब्ध हैं – कीमतें बजट के अनुसार 500 ₹ से शुरू होती हैं।
भक्ति की बात करें तो वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य द्वार ‘बाणासिंह’ कहा जाता है, जहाँ कई भक्त अपना मनोकामना लिखते हैं और टॉर्च‑लाइट वाली शंकु में रख देते हैं। पूजा के दौरान धूप (अग्नि) जलाना अनिवार्य माना जाता है, इसलिए यदि आप घर से लाते हैं तो साफ़ लकड़ी या कोयले का प्रबंध रखें।
भोजन की सुविधा भी यात्रा में अहम है। बारामुला और कूटा दोनों जगह छोटे-छोटे भोजनालय होते हैं जहाँ दाल‑भात, पराठा, चाय‑पानी उपलब्ध रहता है। अगर आप शाकाहारी या विशेष आहार चाहते हैं तो पहले से पूछना उचित रहेगा – कई होटल अपने मेन्यू में वैदिक खाने के विकल्प रखते हैं।
सुरक्षा की बात न छूटे: रास्ते में कभी भी अकेले नहीं चलें, समूह बनाकर यात्रा करें और स्थानीय गाइड को साथ रखें। बारिश या बर्फ़ीला मौसम आने पर ट्रैक बंद हो सकता है, इसलिए आधिकारिक वेबसाइट से अपडेट चेक करते रहें।
अंत में यह कहूँगा कि वैष्णो देवी की यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आत्म‑निरीक्षण का भी अवसर है। जब आप पहाड़ों के बीच श्वास लेते हैं तो मन शांत हो जाता है और ऊर्जा नई मिलती है। थोड़ी तैयारी, सही समय और उपयुक्त सामान से इस तीर्थयात्रा को यादगार बनाएं। शुभ यात्रा!
जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में हुए बस आतंकी हमले में एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत नौ लोगों की जान गई। जयपुर से वैष्णो देवी की यात्रा पर निकले परिवार के सदस्यों में दो वर्षीय बेटा भी शामिल था। उत्तर प्रदेश से बलरामपुर के रिश्तेदार भी मारे गए। घायलों का इलाज जारी है।