जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसकी संपत्ति किसे मिलेगी, यह सवाल हर परिवार को कभी न कभी सोचना पड़ता है। इसे हम उत्तराधिकार या उतराधिकारी कहते हैं। कानून में इसका मतलब है कि कौन‑कौन व्यक्ति मरने वाले के मालमत्ते का हक़दार है और कैसे वह हिस्सेदारी बाँटी जाएगी।
भारतीय वारिसी कानून में दो मुख्य धारा हैं – हिंदू वैधता अधिनियम और इंसाफ़ कोर्ट के फैसले. अगर मृतक हिंदू, मुस्लिम या सिख था तो अलग‑अलग नियम लागू होते हैं। आम तौर पर पत्नी, बच्चे, माता‑पिता और कभी‑कभी भाई‑बहन को अधिकार मिलता है। बच्चों में प्राथमिकता होती है, फिर माँ‑बाप का हिस्सा आता है।
ध्यान रखें कि अगर कोई वसीयत बनाता है तो वह कानूनी तौर पर पहले माना जाता है, बशर्ते वह वैध हो और सभी नियमानुसार बनाई गई हो। वसीयत नहीं होने की स्थिति में कानून के तय हिस्सों को बांटा जाता है।
हाल ही में कई प्रमुख समाचारों ने उत्तराधिकार पर प्रकाश डाला। एक बड़े शेयरधारी की मृत्यु के बाद उनके परिवार को कंपनी के शेष हिस्से को लेकर बहस हुई, जहाँ कोर्ट ने वसीयत का सम्मान कर हिस्से बाँटे। इसी तरह, जियो के ₹1049 रिचार्ज प्लान के पीछे कंपनी के बौद्धिक संपदा अधिकारों को उत्तराधिकारियों द्वारा कैसे संभाला गया, इस पर भी चर्चा रही।
एक और दिलचस्प केस में एक फिल्म स्टार की मृत्यु के बाद उनके प्रॉपर्टी को दो बच्चों में बराबर बाँटना पड़ा, जबकि उनका दूसरा बच्चा विदेश में रहता था। कोर्ट ने स्थानीय कानून के अनुसार सभी बच्चों को समान हिस्सा दिया, जिससे दर्शाया गया कि उत्तराधिकार सिर्फ जमीन‑जायदाद तक सीमित नहीं है, बल्कि बौद्धिक संपदा और व्यावसायिक अधिकारों को भी शामिल करता है।
इन उदाहरणों से साफ़ दिखता है कि वारिसी के नियम हर मामले में थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए सही सलाह लेना ज़रूरी है। अगर आप या आपका कोई रिश्तेदार उत्तराधिकार की प्रक्रिया में फंसा है, तो तुरंत एक वकील से मिलें जो आपके केस को समझे और उचित कदम बताए।
अंत में यह याद रखें कि उत्तराधिकार सिर्फ कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि परिवार के भावनाओं का भी हिस्सा है। साफ‑सुथरी बातचीत, सही योजना बनाना और समय पर वसीयत तैयार करना सबसे बेहतर तरीका है ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो। ज़ेनिफ़ाॅई समाचार ने हमेशा ऐसे उपयोगी जानकारी को सरल भाषा में लाया है, तो इस टैग पेज को बुकमार्क करें और जब भी जरूरत पड़े तब देखें।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के गंभीर रूप से बीमार होने की खबरें सामने आई हैं, जिसके चलते उनका उत्तराधिकारी गुप्त रूप से चुना गया है। रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। यह निर्णय 60 सदस्यीय विशेषज्ञ सभा की बैठक में लिया गया, जिस पर गोपनीयता के कड़े नियम लागू थे।