अगर आप भारत के पुराने टेस्ट मैच देखते हैं तो सुनील गावसकर का नाम ज़रूर सुनेंगे। उन्होंने 1970‑80 के दशक में बैटिंग को नया मुकाम दिया और कई रिकॉर्ड बनाए जो आज भी चर्चा में रहते हैं। उनका खेल सरल, साफ़-सुथरा और दिमागी था – यही वजह है कि नई पीढ़ी के खिलाड़ी अब भी उनसे सीखते हैं।
गावसकर ने अपना अंतरराष्ट्रीय करियर 1971 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया। पहले टेस्ट में ही उन्होंने 117 रन बनाए और टीम को जीत दिलाई। फिर क्या, उनके हाथों से रनों का बवंडर चल पड़ा। कुल 108 टेस्ट मैचों में 10,122 रन, औसत 51.12 – आज भी यही भारत के सबसे बेहतर टेस्ट बैट्समैन का औसत है। उनका सबसे बड़ा शतक 236* था जो उन्होंने इंग्लैंड में बनाकर इतिहास रचा।
केवल रन नहीं, गावसकर ने कई और रिकॉर्ड तोड़े। वह पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने एक ही साल में दो टेस्ट सीरीज़ में 500 से अधिक रन बनाए। उनके नाम ‘सबसे तेज़ डबल सेंचुरी’ का खिताब भी था – 1978‑79 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 163 बॉल्स पर 200 बनाकर यह साबित किया कि तेज़ी और तकनीक साथ चल सकती है।
आज जब हम आईपीएल, टेस्ट टूर या सिमा‑गावसकर ट्रॉफी के बारे में बात करते हैं तो गावसकर की छवि पीछे नहीं रहती। सिमा‑गावसकर ट्रॉफी भारत‑ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज़ को नाम देती है और इसका उद्देश्य दो देशों के बीच लंबी, मज़बूत क्रिकेट बंधन बनाना है – बिल्कुल वैसा ही जैसा सुनील ने अपने खेल से दिखाया था। हर बार जब इस ट्रॉफी की बात आती है तो फैंस गावसकर की यादों में खो जाते हैं।
जैसे आज के खिलाड़ी जासप्रीत बुमराह या रवी शास्त्री अक्सर अपने तकनीकी काम को सुनील से तुलना करते हैं – उनका बैटिंग स्टाइल, पैरों का उपयोग और सिचुएशन अंडरस्टैंडिंग गावसकर जैसा ही दिखता है। बुमराह के पिच पर टॉप-ऑर्डर में खेलने की रणनीति भी कई बार ‘गावसकर फॉर्मूला’ को याद दिलाती है – यानी शुरुआती ओवर्स में स्थिर रहना और फिर तेज़ी से रन बनाना।
गावसकर ने अभी‑अभी अपना करियर नहीं छोड़ा था, लेकिन वह अब क्रिकेट कमेंट्री और चयन समिति में सक्रिय हैं। उनके निर्णयों से युवा खिलाड़ियों को मौका मिलता है और टीम की स्ट्रैटेजिक प्लानिंग बेहतर होती है। अगर आप नए क्रिकेट फैन हैं तो उनके इंटरव्यू देखिए – उनमें कई ऐसे टिप्स हैं जो आपके खेल को अगले लेवल पर ले जा सकते हैं।
सुनील गावसकर का नाम सिर्फ अतीत की कहानी नहीं, बल्कि आज के क्रिकेट में भी जीवंत है। उनका स्टाइल सीखने से आप अपनी बैटिंग में भरोसा और समझ बढ़ा सकते हैं। तो अगली बार जब आप क्रिकेट देखेंगे, याद रखिए – हर बड़े शॉट के पीछे गावसकर जैसी सोच छिपी होती है।
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर चल रहे चौथे टेस्ट के दौरान ऋषभ पंत के आउट होने पर कड़ी आलोचना की। पंत ने एक जोखिमभरा स्कूप शॉट खेला, जो कि ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज स्कॉट बोलैंड की गेंद पर नैथन लायन के हाथों आउट हो गया। गावस्कर ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि दो फील्डरों की मौजूदगी में ऐसा शॉट गलत निर्णय था।