नवजात शिशु की देखभाल: नई माँ के लिए उपयोगी गाइड

पहली बार माँ बनने का जज्बा जबरदस्त होता है, लेकिन साथ में कई सवाल भी आते हैं। बच्चा अभी छोटा है, उसकी जरूरतें खास होती हैं और थोड़ा‑बहुत गलत कदम बड़ी दिक्कत बना सकते हैं। इस लेख में हम सबसे ज़रूरी बातों को सरल शब्दों में समझाते हैं, ताकि आप आराम से अपने नवजात शिशु की देखभाल कर सकें।

खाना‑पीना और पोषण

नवजात शिशु के लिए माँ का दूध सबसे बेहतरीन खाना है। पहले ६ महीने में केवल स्तनपान ही पर्याप्त होता है, क्योंकि इसमें सभी जरूरी विटामिन, एंटीबॉडी और कैलोरी होते हैं। अगर आप फॉर्मूला इस्तेमाल कर रही हैं, तो डॉक्टर की सलाह से सही ब्रांड चुनें और तैयार करने का तरीका ठीक रखें – पानी का तापमान ३५‑४०°C होना चाहिए और बोतल को हमेशा साफ़ रखें।

भले ही बच्चा छोटी मात्रा में खाता हो, लेकिन उसे हर दो‑तीन घंटे पर फ़ीड कराना जरूरी है। इससे उसकी हाइड्रेशन बनी रहती है और वजन बढ़ता है। जब बच्चा ४ महीने के आसपास पहुँच जाए, तो आप धीरे‑धीरे थोड़ा सा ठोस भोजन (जैसे चावल का दलिया) दे सकते हैं, लेकिन यह कदम डॉक्टर की सलाह पर ही उठाएँ।

नींद और सुरक्षित सोने की जगह

नवजात शिशु को दिन में १४‑१७ घंटे की नींद चाहिए। सबसे अच्छा तरीका है कि उसे अपनी पीठ के बल, सपाट सतह (जैसे क्रिब या प्लास्टिक बेड) पर रखें। बिस्तर पर तकिए, कंबल या कोई भी ढीला सामान नहीं रखना चाहिए – ये सॉफ़्ट बॉडी सिंड्रोम का कारण बन सकते हैं।

अगर आप रात में बच्चे को सोने के लिए हिलाते‑हिलाते थक गईं, तो एक छोटा संगीत प्लेयर या सफ़ेद शोर (white noise) चलाना मददगार हो सकता है। यह शिशु को आराम देता है और उसे अचानक जागने से रोकता है।

एक और अहम बात है कमरे का तापमान – २३‑२५°C रखें, न तो बहुत ठंडा न ही बहुत गरम। इस रेंज में बच्चा आसानी से सो जाता है और शरीर का तापमान स्थिर रहता है।

स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण

पहले महीने के भीतर डॉक्टर के पास ले जाना अनिवार्य है। इसमें वजन, लम्बाई, सिर की परिधि जैसी बुनियादी मापें ली जाती हैं और कोई संक्रमण तो नहीं, देखी जाती है। टीके भी समय‑सारणी अनुसार देना चाहिए – जैसे हिपा, ब्रेस्टिलिस, पोलियो आदि।

यदि बच्चा बार‑बार उल्टी करता है या बुख़ार रहता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती चरण में समस्या को पहचानना आसान होता है और इलाज भी जल्दी हो जाता है।

प्यार और संवाद

भले ही शिशु अभी शब्द नहीं बोलता, लेकिन वह आपके स्वर, चेहरे की अभिव्यक्ति और स्पर्श से बहुत कुछ समझ लेता है। रोज़‑रोज़ गाने गाएँ, धीरे‑धीरे बातें करें और आँखों में मिलाकर मुस्कुराएं – इससे उसके मस्तिष्क का विकास तेज़ होता है।

जब आप बच्चे को घेरते हैं या बाथटब में डालते हैं, तो हल्का‑हल्का स्पर्श रखें। यह सिर्फ सुरक्षा नहीं बल्कि भरोसा भी बनाता है, जिससे बच्चा भविष्य में सामाजिक रूप से मजबूत बनेगा।

संक्षेप में, नवजात शिशु की देखभाल तीन चीज़ों पर टिकती है: सही पोषण, सुरक्षित नींद और समय‑पर स्वास्थ्य जांच। इन बुनियादी बातों को अपनाकर आप अपने बच्चे को स्वस्थ बढ़ते हुए देख सकती हैं और माँ के रूप में भी आत्मविश्वास महसूस कर सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें – यही सबसे भरोसेमंद उपाय है।

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