दोनों देशों के बीच रिश्ते कभी दोस्ती, कभी तनाव में रहे हैं। लेकिन अभी हम देख रहे हैं कि दोनों सरकारें मिलकर कई मुद्दों का हल ढूंढ रही हैं। अगर आप भारत‑बांग्लादेश की खबरों को रोज़ फॉलो करते हैं, तो आपको पता चलता है कि सीमा पर सुरक्षा, जल साझा करने और व्यापारिक समझौते लगातार अपडेट होते रहते हैं।
पिछले साल दो देशों ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की थी – जैसे कि बांग्लादेश में भारतीय निवेश से बने कारखाने, और भारत‑बांग्लादेश जल साझेदारी समझौता। ये कदम दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ देते हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं। साथ ही सीमा पर छोटे‑छोटे झगड़े अब कूटनीतिक बातचीत से सुलझाए जा रहे हैं, जिससे लोगों की daily life पर कम असर पड़ रहा है।
व्यापार में भी काफी उछाल आया है। भारत से बांग्लादेश को निर्यात में कपड़ा और फार्मास्यूटिकल्स प्रमुख हैं, जबकि बांग्लादेश से रेशमी वस्त्र और जूट का आयात बढ़ा है। दोनों देशों के व्यापारिक आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे दोनों की अर्थव्यवस्थाएँ मजबूत हो रही हैं।
आगामी वर्षों में जल संसाधनों का बंटवारा एक बड़ा सवाल बना रहेगा। गंगे‑ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों की बाँध और जल वितरण पर नई समझौता प्रक्रिया चल रही है। अगर दोनों पक्ष मिलकर समाधान निकालते हैं, तो कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और पानी की कमी की समस्या कम होगी।
ऊर्जा क्षेत्र भी सहयोग का नया मंच बन सकता है। बांग्लादेश को बिजली के लिए भारत से ग्रिड कनेक्शन चाहिए, जबकि भारत को सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में बांग्लादेशी तकनीक से फायदा हो सकता है। ऐसी साझेदारियाँ न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक तौर पर भी फायदेमंद होंगी।
सुरक्षा और सीमा नियंत्रण के मामले में दोनों देशों ने मिलकर ट्रेनिंग और जाँच‑पड़ताल को बढ़ाया है। इससे आतंकवादियों का नेटवर्क कमजोर हो रहा है, और स्थानीय लोगों को सुरक्षित महसूस होते हैं। इस दिशा में आगे भी joint patrols और intelligence sharing जारी रहेगा।
संक्षेप में, भारत‑बांग्लादेश संबंधों की कहानी अब सिर्फ सीमा के खींचतान तक सीमित नहीं रही; यह व्यापार, जल, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में गहरी साझेदारी की ओर बढ़ रही है। अगर आप इन बदलावों पर नज़र रखें, तो समझ पाएँगे कि दोनों देशों का भविष्य कितना उज्ज्वल हो सकता है।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में भव्य राजकीय स्वागत मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात में द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा। सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी प्रमुख चर्चा विषय। भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पर भी बल।