हमें अक्सर अस्पताल में आग की खबर सुनने को मिलती है, लेकिन कई बार हम नहीं जानते कि ये क्यों होते हैं और इससे बचाव के लिए हमें क्या करना चाहिए। इस लेख में हम recent घटनाओं पर नज़र डालेंगे, आम कारण बताएंगे और आसान सुरक्षा टिप्स देंगे ताकि आप और आपके प्रियजन सुरक्षित रहें।
आग लगने की वजहें अक्सर दो प्रकार की होती हैं – तकनीकी खराबी और मानव त्रुटि। बिजली का शॉर्ट सर्किट, एसी या हीटर में दिक्कत, गैस सिलिंडर का लीक होना सबसे आम हैं। कभी‑कभी बेअंदाज़ी से धूम्रपान या खुले में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस्तेमाल करना भी बड़ी समस्या बन जाता है। इन कारणों को समझ कर हम जोखिम कम कर सकते हैं।
अगर अस्पताल में आग लग जाए तो सबसे पहले शांत रहना जरूरी है। नीचे दिए गए सरल स्टेप फॉलो करें:
इन छोटे-छोटे कदमों से आप अपने और दूसरों के जीवन की रक्षा कर सकते हैं।
आग लगने के बाद अस्पताल का पुनर्निर्माण भी जरूरी है। प्रशासन को चाहिए कि वे फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम और एमरजेंसी लाइट्स सही जगह पर रखें। नियमित ड्रिल करवाना, स्टाफ को ट्रेनिंग देना और सभी उपकरणों की जांच करना भी ज़रूरी है। इस तरह के प्रैक्टिस से अगली बार अगर कुछ हो भी तो नुकसान कम होगा।
अस्पताल में रहने वाले रोगी अक्सर बहुत कमजोर होते हैं, इसलिए उनका विशेष ध्यान रखना चाहिए। बेड साइड पर छोटे फायर एक्सटिंग्विशर रख सकते हैं और स्टाफ को तुरंत प्रतिक्रिया के लिए तैयार करना चाहिए। अगर कोई मरीज खुद ही रसोई या लैब में काम कर रहा हो तो उसे सुरक्षा नियमों की पूरी जानकारी दें।
अंत में, घर जैसा माहौल बनाना भी मददगार होता है। साफ‑सफ़ाई रखें, जला हुआ कचरा तुरंत हटाएँ और गैस सिलिंडर को सही तरीके से स्टोर करें। छोटे-छोटे कदम बड़े फर्क डालते हैं।
आशा करते हैं कि ये जानकारी आपके लिये उपयोगी रहेगी। अग्निकांड की खबरें आते ही आप तैयार रहें, क्योंकि तैयारी ही सुरक्षा की कुंजी है।
उत्तर प्रदेश के झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात इंटेंसिव केयर यूनिट में लगी आग ने दस नवजातों की जान ले ली और 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की संभावना जताई गई है। सरकारी जांच के आदेश दिए गए हैं, जबकि मृतकों के परिवारों को ₹5 लाख की सहायता राशि दी जाएगी।