अगर आपके बच्चे या आप खुद अक्सर ध्यान नहीं लगा पाते, जल्दी बोर हो जाते हैं और लगातार चलते-फिरते रहते हैं, तो यह ADHD (Attention Deficit Hyperactivity Disorder) का संकेत हो सकता है। बहुत से लोग इसे सिर्फ ‘बच्चे की शरारत’ समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक मेडिकल स्थिति है जिसे सही जानकारी और इलाज़ से सुधारा जा सकता है।
ADHD के तीन प्रमुख पहलू होते हैं: ध्यान में कमी, अति सक्रियता और आवेगी व्यवहार। स्कूल में बच्चा असाइनमेंट पूरा नहीं कर पाता, बार‑बार बातें तोड़ देता है या बिना सोचे‑समझे बात कर देता है। घर पर भी अक्सर चीजें भूल जाता है, खेलते समय लगातार जगह बदलता रहता है। वयस्कों में यह काम की देर से शुरूआत, मीटिंग में ध्यान न देना और अचानक निर्णय लेना के रूप में दिख सकता है। यदि ये लक्षण कम से कम छह महीने तक लगातार दिख रहे हों तो डॉक्टर से जांच कराना सही रहेगा।
ADHD का इलाज़ केवल दवाईयों पर नहीं टिकता। सबसे पहले बच्चे या व्यक्ति को एक व्यवस्थित रूटीन देना जरूरी है – हर दिन समान समय पर खाना, पढ़ना और सोना। स्कूल में शिक्षक से बात करके क्लासरूम की सेटिंग बदलवाएँ, जैसे बैठने की जगह आगे रखें या शॉर्ट ब्रेक दें। अगर डॉक्टर दवा लिखते हैं, तो आमतौर पर स्ट्रेटेरॉयड्स (जैसे मिथाइलफेनिडेट) इस्तेमाल होते हैं, लेकिन इन्हें नियमित मॉनिटरिंग के साथ ही लेना चाहिए।
साथ ही फिजियोथेरेपी और खेल थेरेपी भी मददगार होते हैं। बच्चों को साइक्लिंग, तैराकी या योग जैसी एरोबिक एक्टिविटी में शामिल करने से ऊर्जा का सही आउटलेट मिलता है और ध्यान बढ़ता है। वयस्कों के लिए माइंडफुलनेस मेडिटेशन, टाइम‑मैनेजमेंट ऐप्स और कॉग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी (CBT) बहुत प्रभावी साबित हुई हैं।
पैरेंटिंग स्टाइल भी काफी असर डालती है। लगातार टॉन्स नहीं बल्कि सकारात्मक रिवार्ड सिस्टम लागू करें – छोटा काम पूरा करने पर सरप्राइज़ या छोटी प्रशंसा दें। इससे बच्चा खुद को प्रोत्साहित महसूस करता है और बुरा व्यवहार घटता है।
ध्यान रखें, ADHD किसी की ‘गलती’ नहीं है और इसे ठीक करना कोई ‘जादू’ नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास का काम है। सही जानकारी, डॉक्टर की मदद और परिवार का समर्थन मिलकर इस स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। अगर आप या आपका बच्चा इन लक्षणों से जूझ रहा है, तो जल्दी से जल्दी पेशेवर सलाह लें – समय पर शुरूआत करना सबसे बड़ा फायदा देगा।
मलयालम अभिनेता फहाद फासिल ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से खुलासा किया कि उन्हें 41 वर्ष की आयु में ध्यान-अभाव अति सक्रियता विकार (ADHD) का निदान किया गया है। यह खुलासा उन्होंने कोठामंगलम में हुए एक उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान किया। इस घटना से फहाद ने मानसिक स्वास्थ्य और ADHD के साथ जुड़ी चुनौतियों एवं ताकतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की है।