जब शादी के बाद रिश्ते में लगातार टकराव, भरोसे की कमी या हिंसा हो जाए तो तलांज सोचना सामान्य है। तलाक मतलब दो लोगों को कानूनी तौर पर अलग करना, ताकि दोनों स्वतंत्र रूप से जी सकें। लेकिन यह फैसला हल्के में नहीं लेना चाहिए—इसे सोच‑समझ कर करना जरूरी है क्योंकि इसके बाद वित्तीय, बच्चों की देखभाल और सामाजिक प्रभाव भी होते हैं।
पहला कदम है दो तरफ़ से तलाक का आवेदन कोर्ट में देना। अधिकांश मामलों में विवाह के 1 साल बाद या उसके बाद ही अदालत तलाक स्वीकार करती है, लेकिन अगर दहेज, हिंसा या अन्य गंभीर कारण हों तो जल्दी भी हो सकता है।
आवेदन में शादी का प्रमाण‑पत्र, पहचान पत्र और अगर बच्चे हैं तो उनकी जन्मप्रमाण पत्र लगाना पड़ता है। कोर्ट तब दो पक्षों से साक्षी और दस्तावेज़ मांगता है, जिससे यह तय किया जाता है कि तलाक उचित है या नहीं।
कभी‑कभी अदालत समझौते की कोशिश करती है, जैसे अलग‑अलग रहने का समय तय करना या आर्थिक समझौता। अगर दोनों सहमत हों तो प्रक्रिया तेज़ हो जाती है; वरना कोर्ट को पूरी सुनवाई करनी पड़ती है और इससे कई महीने लग सकते हैं।
तलाक के बाद महिलाओं को भरण‑पोषण (maintenance) मिलने का अधिकार है, खासकर अगर वह आर्थिक रूप से कमजोर हों या बच्चों की देखभाल कर रही हों। भरण‑पोषण की राशि अदालत तय करती है, जो पति की आय और पत्नी की जरूरतों पर निर्भर करता है।
संपत्ति विभाजन भी महत्वपूर्ण है। शादी के दौरान बनी जायदाद (जैसे घर, गाड़ी, बैंक में जमा) को कोर्ट दोनों पक्षों के योगदान के आधार पर बाँटता है। अगर कोई विशेष समझौता हो तो वह अदालत द्वारा मान्य किया जा सकता है।
बच्चे होते हैं तो उनकी हक़-ए‑संपर्क (custody) तय होती है। कोर्ट बच्चे की भलाई को प्राथमिकता देता है और माँ या पिता में से जो बेहतर देखभाल कर सके, उसे मुख्य अभिभावक मानता है। मुलाकात का समय भी निर्धारित करता है ताकि दोनों माता‑पिता अपने बच्चें के साथ रह सकें।
मनोवैज्ञानिक मदद लेना भी फायदेमंद है। तलाक के बाद अक्सर तनाव, उदासी या गुस्सा महसूस होता है। काउंसलर से मिलकर आप अपनी भावनाओं को समझ सकते हैं और आगे की राह तय कर सकते हैं। कई NGOs मुफ्त में परामर्श देती हैं, इसलिए खोज‑बीन करके मदद लेनी चाहिए।
अंत में याद रखें—तलाक कोई हार नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। सही जानकारी और कानूनी सलाह लेकर आप अपने भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं। अगर आप या आपके जानने वाले इस दिशा में कदम रखने की सोच रहे हैं, तो पहले वकील से मिलें, दस्तावेज़ तैयार करें और मनोवैज्ञानिक समर्थन लें। यही तरीका है जिससे तलाक का सफर जितना संभव हो उतना आसान बन सके।
धनश्री वर्मा और युजवेंद्र चहल के तलाक की अफवाहों ने जोर पकड़ा है, जब दोनों ने सोशल मीडिया पर विश्वास और धैर्य के बारे में संदेश साझा किए। बांद्रा फैमिली कोर्ट में तलाक की सुनवाई के बाद मीडिया में चर्चाएं उभरीं, हालांकि उनके समुदायिक पोस्ट्स से कहानी और जटिल हो गई है।